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Thursday, 12 December 2019

कौन जीतेगा बगोदर विधानसभा से...

किसके सर होगा बगोदर विधानसभा के विधायकी का ताज

     वर्षों से वामपंथी राजनीति का केंद्र रहे झारखंड के बगोदर विधानसभा क्षेत्र में भाकपा माले के एकछत्र राज को खत्म करते हुवे जब 2014 में भाजपा के नागेंद्र महतो पहली बार विधायक निर्वाचित हुवे तो राज्य की राजनीति में उनका नाम एक बड़े नेता के रूप में लिया जाने लगा।

बगोदर विधानसभा, bagodar vidhansabha, bagodar legislative constituency
नागेंद्र महतो(बीजेपी), विनोद कुमार सिंह(माले) बासुदेव प्रसाद वर्मा(कांग्रेस)
(बायें दायें क्रमशः)

        कुछ लोग कहते हैं लगातार दो बार बगोदर से विधायक निर्वाचित हुवे भाकपा माले के विनोद कुमार सिंह जी, 2014 विधानसभा चुनाव में नागेंद्र महतो के लिए एक कठिन प्रतिद्वंद्वी थे उन्हें हराना आसान नही था, लेकिन उस समय मोदी लहर चरम पर था इसलिए वो 4339 वोटों के अंतर से जनता का विश्वास जितने में सफल रहे।

नागेन्द्र महतो के लिए चुनौतियां

         लेकिन 2019 विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए राह आसान नही है, श्री महतो के लिए चुनौतियां बहूत हैं, इन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं, भाजपा के बागी नेता बासुदेव प्रसाद वर्मा जिन्होंने हाल ही में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को अलविदा कह कांग्रेस का दामन थाम लिया है। श्री वर्मा बगोदर विधानसभा क्षेत्र के बिरनी प्रखंड से हैं और इस बार बगोदर विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार है, पिछले 30 वर्षों से वो राजनीति में सक्रिय हैं, भारतीय जनता पार्टी में शीर्ष पदों पर रहते हुवे भी वो स्थानीय राजनीति को प्राथमिकता देते आये हैं।
             एक स्थानीय काँग्रेस नेता से जब कांग्रेस के जीत की संभावनाओं के बारे में अंत्योदय भारत टीम ने पूछा उनका जबाब था "युवा बेरोजगार है और नौकरीओं में बाहरियों की बहाली से परेशान है, पूरे प्रदेश को 13/11 जिलों में बाँटकर गलत स्थानीय और नियोजन नीति बनाकर सीधे तौर पर सरकार दूसरे राज्यों के छात्रों को नौकरियों में बहाली कर राज्य के युवाओं को नौकरीओं से वंचित किया है, पारा शिक्षक और आंगनबाड़ी सेविकाओं पर पड़े लाठी के घाव अभी भी नहीं भरे हैं, गैरमजरूआ खास जमीन को प्रतिबंधित करने से किसानों सहित पूरे प्रदेश की जनता खफा है, हजारों सरकारी विद्यालयों को बंद कर दिया गया। भाजपा ने सभी वर्गों का नुकसान किया है इसलिए इसबार जनता ने अपना मन बना लिया है भाजपा के झांसे में नहीं आने वाली है।"


बगोदर विधानसभा में माले का इतिहास

          नागेंद्र महतो के लिए दूसरी चुनौती हैं माले के विनोद कुमार सिंह जी जो बगोदर विधानसभा से दो बार(2005 और 2009) विधायक निर्वाचित हो चुके हैं, सादगी पसंद और जमीन से जुड़े हुवे नेता माने जाते है, स्थानीय राजनीति में सक्रिय रह कर दलितों, शोषितों, पीड़ितों, वंचितों के हक की आवाज हमेशा उठाते रहे हैं। इनके पिता कॉ महेंद्र प्रसाद सिंह अपने पूरे राजनीतिक जीवन गरीबों, मजदूरों, वंचितों के प्रति अन्याय और शोषण के खिलाफ आवाज उठाते रहे। महेंद्र प्रसाद सिंह पहली बार 1990 में बगोदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुवे और 2005 तक लगातार बगोदर विधानसभा से निर्वाचित होते रहे। उन्होंने 1982 से लेकर 2005 के दौर में बिहार और झारखंड की वामपंथी राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ी। 16 जनवरी 2005 को नक्सलियों द्वारा उनकी हत्या के पश्चात विनोद कुमार सिंह जी ने इसी क्षेत्र से माले का प्रतिनिधित्व किया और लगातार दो बार विधायक निर्वाचित हुवे। राजनीति के कुछ जानकार कहते हैं, माले का बगोदर विधानसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़ है, इनका अपना एक अलग वोटर वर्ग है इस क्षेत्र के गरीबों, मजदूरों और किसानों का विश्वास सदा माले पर रहा है।

   बगोदर विधानसभा की समस्यायें

             लेकिन श्री महतो के लिए सबसे बड़ी चुनौती उन पर लगा आरोप है की उन्होंने बगोदर विधानसभा क्षेत्र के जनता की समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया। वर्षों से लोग बिजली आपूर्ति की दयनीय स्थिति से पीड़ित है, कभी सप्ताह में चार-पाँच घंटे तो कभी महीनों तक बिजली गुल। बिजली आपूर्ति की इतनी खराब स्थिति के बावजूद बिजली बिल में कभी कोई कटौती नहीं किया गया। आलम ये है की बिना बिजली आपूर्ति किये एक-एक गरीब परिवार के ऊपर पंद्रह से बीस हजार का बिल बकाया है, अब सवाल उठता है की इस हाड़तोड़ महंगाई में वो मजदूरी कर दो जून के रोटी का इंतजाम करे या फिर बिजली बिल का भुगतान करे। द्वारपहरी मॉडल विद्यालय, भरकट्टा पॉवर सब स्टेशन, बरहमसिया पानी सप्लाई टंकी से पानी सप्लाई जैसी दर्जनों योजनाएं आधे अधूरे पड़े हैं।
             विनोद कुमार सिंह जी कहते है "विधानसभा क्षेत्र की जनता त्रस्त है और विधायक जी व्यस्त हैं अपने पसंद के ठेकेदार को ठेका दिलाने में।" दरअसल पिछले दिनों नागेंद्र महतो जी के पुत्र रवि महतो को रांची में कंपोजिट कंट्रोल रूम में टेंडर भरने आये ठेकेदारों को पिता के विधायक होने का रौब दिखाते हुवे टेंडर भरने से रोकने की खबर सभी समाचार पत्रों ने प्रमुखता से छापा था।
             बहरहाल नागेंद्र महतो जी के लिए चुनौतियां कम नही है, झारखंड विकास मोर्चा की रजनी कौर भी कड़ी टक्कर में है। भाजपा के लिए बगोदर सीट महत्वपूर्ण है, कोई बड़े उलटफेर न हो जाए इसलिए बड़े चेहरों से यहाँ चुनाव प्रचार करा रही हैं पिछले दिनों वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह और भोजपुरी गायक पवन सिंह को नागेंद्र महतो के समर्थन में चुनाव प्रचार करते देखा गया।
           लोकतंत्र में वोट जनता की ताकत होती है, जनता मालिक होती है लेकिन कुछ नेता सत्ता हाथ लगते ही अपने को मालिक और जनता को नौकर समझ बैठते हैं।
             चुनाव में पांच दिन बाकी है, अब सवाल उठता है जनता किसपर विश्वास करेंगीं? क्या नागेंद्र महतो अपनी सीट बचा पाएंगे? क्या विनोद कुमार सिंह अपनी पिछली हार को जीत में बदल पाएँगे? या फिर जनता बासुदेव प्रसाद वर्मा को पहली बार विधानसभा जाने का मौका देंगी। प्रश्न बहुत हैं लेकिन इनके उत्तर देना जल्दबाजी होगा।
           देखना दिलचस्प होगा बगोदर विधानसभा क्षेत्र के 3 लाख 13 हजार 861 वोटर किसे वोट देने का मन बनाकर 16 दिसम्बर को घर से निकलते हैं और 23 दिसंबर को किन्हें चुनते हैं। जो भी निर्वाचित हो जनता को उम्मीद है  उनके मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति की दिशा में उचित प्रयास किये जाएंगे।

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