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Sunday, 8 December 2019

हलधर नाग: पद्मश्री से सम्मानित मात्र तीसरी पास कोसली भाषा के महान कवि


मात्र तीसरी पास महान कवि पद्मश्री हलधर नाग के जीवन संघर्ष की कहानी

'लोककवि रत्न' के उपनाम से साहित्य की दुनियां में प्रसिद्ध कोशली भाषा के महान कवि पद्मश्री हलधर नाग जी के जीवन संघर्ष की कहानी।  
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हलधर नाग

हलधर नाग का जीवन संघर्ष

दुनियां में कुछ लोग जीवन में आने वाले छोटी-छोटी बाधाओं और असफलताओं से घबरा जाते है, हतोत्साहित हो जाते हैं, परिस्थितियों से हार मान लेते हैं और जीवन को प्रभावित कर बैठते है।
          वहीं कुछ दृढ़ निश्चयी, सफलता की अभीप्सु तथा अटूट आत्मविश्वास वाले लोग हैं जिन्हें न उनकी असफलता हरा पाती है और न हीं बुरे हालात और परिस्थितियाँ उन्हें उनके कर्मपथ से डिगा पाती है।
    एक ऐसे हीं व्यक्ति की यह असाधारण कहानी है, जो सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के वावजूद सफलता की उचाईयों को छुवे है। ये कहानी है उड़ीसा के कोशली भाषा के महान कवि और लेखक श्री हलधर नाग जी की, जिन्होंने साबित किया है की यदि दृढ़ निश्चय हो तो दुनियां में कुछ भी नामुमकिन नहीं।

हलधर नाग जीवन परिचय

         श्री हलधर नाग जी का जन्म 31 मार्च 1950 को ओड़ीसा के बरगढ़ जिला के घेंस गांव में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। जब ये मात्र 10 वर्ष के थे तो उनके पिता का देहांत हो गया। श्री नाग मात्र तीसरी कक्षा तक की औपचारिक शिक्षा ले सके क्योंकि पिता की मृत्यु के बाद घर की दयनीय स्थिति को देखकर इन्हें बीच मे ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी, घर के खर्चे के लिए इन्हें दो साल तक पास के होटल में बर्तन धोने का काम करना पड़ा, फिर गाँव के प्रमुख के मदद से एक उच्च विद्यालय के होस्टल में रसोइया का काम मिल गया जहाँ उन्होंने 16 वर्षों तक काम किया, स्कूल में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि उनके गाँव में बहुत सारे स्कूल खुल रहे हैं फिर श्री नाग एक बैंक से 1,000 रुपए लोन लेकर स्‍कूली बच्‍चों के लिए स्‍टेशनरी और खाने-पीने के दूसरे सामानों वाली एक छोटी दुकान खोल ली।

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हलधर नाग

   हलधर नाग का साहित्यिक जीवन
          

     श्री नाग बचपन से ही लोक साहित्य और लोक गीतों में रुचि रखते थे, कोशली में लोक कथाएँ लिखने वाले नाग ने 1990 में अपनी पहली कविता लिखी। जब उनकी कविता ‘धोडो बरगाछ’ (पुराना बरगद का पेड़) एक स्थानीय पत्रिका में प्रकाशित हुई, तो इसके बाद उन्होंने चार और कवितायेँ भेज दी और वो सभी प्रकाशित हो गए। इससे कविता लेखन के प्रति उनका झुकाव बढ़ता गया, आस-पास के गांवों का दौरा कर अपनी कविताओं को सुनाने लगे लोग उन्हें सम्मानित करने लगे जिससे उनका प्रोत्साहन बढ़ता गया, उनकी कविताओं को आलोचकों और प्रशंसकों से सराहना मिलने लगी। यहीं से उन्हेंलोक कवि रत्ननाम से जाना जाने लगा और इसके बाद उन्होंने दुबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा।
           हलधर नाग को अपनी सारी कविताएं और अब तक उनके लिखे 20 महाकाव्य कंठस्थ हैं। श्रीनाग की कोसली भाषा की कविता संबलपुर विश्वविद्यालय के पाँच विद्वानों के पीएचडी अनुसंधान का विषय रहा है। संबलपुर विश्वविद्यालय द्वारा उनके लेखन के संग्रह 'हलधर ग्रंथावली-2' को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। 

हलधर नाग की कुछ कवितायें और महाकाव्य

हलधर ग्रन्थावली -१
हलधर ग्रन्थावली -२
सम्पर्द
कृष्णगुरु
लोकगीत
अछिया
बछर
महासती उर्मिला
प्रेम पाइछन
तारा मन्दोदरी
करमसानी
रसिया कवि
शिरी समलाइ
बीर सुरेन्द्र साइ

        उनकी कवितायें और महाकाव्य सामाजिक मुद्दों और हालात के बारे में बात करती है, उत्पीड़न, धर्म, प्रकृति और पौराणिक कथाओं से लड़ती है, जो उनके आस-पास के दैनिक जीवन से ली गई हैं।
                श्री नाग का मानना है की कविताओं में वास्तविक जीवन से जुड़ाव और लोगों के लिए एक संदेश होना चाहिए। उनका मानना है की हर कोई एक कवि है, पर कुछ ही लोगों के पास उन्हें आकार देने की कला होती है। दिन-प्रतिदिन युवाओं के कोसली भाषा की कविताओं और महाकाव्यों के प्रति बढ़ती रुचि को देखकर उन्हें अच्छा लगता है।

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पद्मश्री पुरुस्कार ग्रहण करते श्री नाग
   
सादा जीवन उच्च विचार के आदर्श को अपनाने वाले श्री नाग हमेशा मात्र एक सफेद धोती-बनियान पहनते है और नंगे पैर चलते है। श्री नाग को उड़िया साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्हें उनके कोसली भाषा साहित्य में असाधारण योगदान के लिए 2019 में संबलपुर विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है।

हलधर नाग जी के जीवन से सीख

       उनका जीवन संघर्ष हमें प्रेरणा देती है की कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय से नामुमकिन को भी मुमकिन किया जा सकता है। दुनिया का हर व्यक्ति जीवन में सफलता की उम्मीद करता हैं इसके लिए वो अथक प्रयास भी करता है। कई बार कुछ अलग करने की चाह और प्रबल प्रेरणा से व्यक्ति अपने मुकाम के करीब पहुँच भी जाता है लेकिन कुछ कठिन संघर्ष को सामने देख सफलता से वंचित हो जाता है।
        श्री नाग का जीवन संघर्ष, जीवन के उतार-चढ़ाव का अनुभव कराता है, सतत सक्रिय रहना सिखाता है, जीवन के कई रंग दिखाता है, कठिनाइयों से पार पाना सिखाता है, अनुभवी बनाता है, समय की कीमत सिखाता है जिससे प्रेरित होकर हम दृढ़ विश्वास के साथ फिर से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हो सकें। हमें सिख देता है की जीवन 'संघर्ष' का दूसरा नाम हैं, जीवन का सबसे बड़ा वरदान है, वो हमें सहनशील, संवेदनशील और देवतुल्य बनाता हैं और सबसे जरूरी जमीन से जुड़े रहना सिखाता है। 
             श्री नाग को एक सूत्र से परिभाषित करने की कोशिश करें तो वो सूत्र इस प्रकार का हो सकता है।
             दृढ़ इच्छाशक्ति + दृढ़ विश्वास + दृढ़ संकल्प + स्थिरता + कड़ी मेहनत = हलधर नाग
             


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1 comment:

  1. कुछ शब्द त्रुटियों को छोड़ दे तो हम इसे सरल भाषा में उत्कृष्ट लेखनी से परिभाषित कर सकते हैं

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