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Friday, 17 January 2020

बाबूलाल मरांडी और भाजपा : कौन किसके खेवनहार


बाबूलाल मरांडी और भाजपा : कौन किसके खेवनहार? क्या कर पाएंगे एक दूसरे की नैया पार?

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भाजपा से अलग होने के बाद बाबूलाल मरांडी जी का राजनीतिक जीवन ढलता चला गया अब वो फिर भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। भाजपा को भी झारखंड में जरूरी है एक ऐसे नेता की जो भाजपा के राज्य में बिगड़ते खेल को संभाल सके। दोनो एक दूसरे में अपनी डूबती नैया के नए खेवैया को देख रहे हैं अब समय बतायेगा कौन किसके खेवनहार बनते हैं। 


बाबूलाल मरांडी एक ऐसा नाम जिनका जिक्र किए बगैर झारखंड का इतिहास लिखना सम्भव हीं नहीं है। दशकों के राजनीतिक संघर्ष के बाद जब 15 नवम्बर 2000 को झारखंड भारत के 29वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया तो बाबूलाल मरांडी को झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुवा। एक शिक्षक के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत कर झारखंड के मुख्यमंत्री तक का सफर तय करने वाले श्री बाबूलाल मरांडी जी किसी परिचय  के मोहताज नहीं हैं। उनका जीवन संघर्षों से भरा हुवा रहा है।
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फ़ोटो साभार : ट्विटर


      1998 से लेकर 2003 तक के समय को बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक जीवन का गोल्डन पीरियड कहा जा सकता है। भाजपा से अलग होकर नई पार्टी का निर्माण उनके लिए बढ़िया निर्णय साबित नहीं हुवा। शायद उन्हें लगा होगा वे झारखंड की राजनीति के ममता बनर्जी साबित होंगे और उनकी पार्टी एक दिन तृणमूल कांग्रेस जैसी सफलता हासिल करेगी लेकिन किसी भी विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी के नतीजे को अच्छा नहीं कहा जा सकता है। उन्हें जेवीएम को झारखंड की राजनीति में शीर्ष पर पहुँचाने के लिए कुछ अच्छे सहयोगी की जरूरत थी लेकिन इसके विपरीत उनके विधायक पार्टी बदलते रहे। आजकल झारखंड की राजनीति में बाबूलाल मरांडी के भाजपा में शामिल होने तथा जेवीएम के भाजपा में विलय करने के निर्णय की खबर चर्चा में बना हुवा है। लोगों को यकीन नहीं हो रहा है ये वही बाबूलाल हैं जो एक समय कहा करते थे भाजपा में शामिल होने से अच्छा कुतुबमीनार से कूद जाना पसंद करूँगा। हालांकि बाबूलाल मरांडी अपने जीवन में दशकों तक भाजपा के पितृ संगठनों से जुड़े रहे हैं तथा भाजपा से अलग होने के बाद भी इन संगठनों तथा भाजपा पर कभी तीखे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किये हैं। भाजपा की स्थिति भी अब झारखंड में अच्छी नहीं रही। रघुवर दास झारखंड के पहले मुख्यमंत्री हुए जो अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा कर सके फिर भी 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा मात्र 25 सीटों पर सिमट कर रह गए। खुद मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने विधानसभा क्षेत्र जमशेदपुर पूर्वी सीट से भाजपा के हीं बागी सरयू राय से चुनाव हार गए।
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 बहरहाल जो भी हो 2019 विधानसभा चुनाव में भाजपा के 28 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में 26 हारने के बाद भाजपा को राज्य में जरूरत है एक मजबूत आदिवासी नेता की तथा 14 सालों से भाजपा से अलग होने के वाबजूद भी अच्छी सफलता हाथ नहीं लगने वाले बाबूलाल को जरूरत है एक नई  शुरूआत की। जेवीएम ही एकमात्र पार्टी है जो 2019 झारखंड विधानसभा चुनाव में सभी 81 सीटों से लड़ी, उसके वावजूद मात्र तीन सीटें प्राप्त हुई। झारखंड के मौजूदा राजनीतिक परिवेश में बाबूलाल तथा भाजपा दोनों को जरूरत है एक खेवनहार की। अब ये देखना दिलचस्प होगा कौन किसके खेवनहार बनते है। कहते हैं डूबने वाले को तिनके का सहारा हीं बहुत अब भविष्य में पता चलेगा दोनों में से कौन किसके लिए तिनका बन पाते हैं।
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एक रैली को संबोधित करते श्री मरांडी(फ़ोटो: ट्विटर)
 कभी भाजपा में शामिल होने की बात पूछने पर भाजपा और जहर में से जहर को चुनना पसंद करूँगा जैसी बात करने वाले बाबूलाल मरांडी जी की भाजपा में कैसी रहेगी दूसरी पारी अब ये तो वक्त हीं बताएगा। फिलहाल बगैर कोई पद लिए भाजपा में शामिल होने की बात उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेताओं को बता दी है। मरांडी ने भाजपा से कहा है कि वे भाजपा में शामिल तो होंगे, पर न तो विधायक दल के नेता का दायित्व लेंगे और न ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे। वे सामान्य कार्यकर्ता के रूप में भाजपा में शामिल होंगे। कभी भाजपा को संथाल क्षेत्रों में जन-जन तक पहुँचाने वाले राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी 14 वर्षों बाद फिर से भाजपा में नई पारी की शुरुआत करेंगे। कभी आरएसएस के निष्ठावान और विश्वसनीय स्वयंसेवक और समर्पित भाजपाई रहे बाबूलाल मरांडी ने वर्ष 2006 में  भाजपा में उपेक्षित महसूस कर झारखंड विकास मोर्चा(प्रजातांत्रिक) नाम से नई पार्टी बना ली थी। इसके बाद वे लगातार दो बार कोडरमा लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने। हालांकि उनकी पार्टी किसी भी विधानसभा चुनाव में अच्छा नहीं कर पाई। उनके कई विधायकों ने मौकों पर पार्टी बदल ली। 2019 में झारखंड में हुए विधानसभा चुनाव में श्री मरांडी धनवार विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए हैं।



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