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Wednesday, 29 January 2020

जनसंख्या नियंत्रण कानून (Population Control Law) क्यों जरूरी...?


जनसंख्या नियंत्रण कानून (Population Control Law)क्यों जरूरी...?


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जनसंख्या नियंत्रण कानून : भारत की तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून आवश्यक हो गया है। जनसंख्या नियंत्रण कानून जरूरी है ताकि जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन बना रहे। समय रहते जनसंख्या नियंत्रण के लिए उपाय नहीं किये गए तो आने वाले दशकों में देश को इसके भयानक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

      पूरी दुनियां वर्तमान में जिन तीन प्रमुख समस्याओं का सामना कर रही है वो हैं आतंकवाद, प्रदूषण और जनसंख्या विस्फोट। दुर्भाग्य से भारत इन सभी समस्याओं से बुरी तरह पीड़ित है।

भारत की जनसंख्या वृद्धि


     भारत की आबादी 1901 में  23 करोड़ थी, 1950 में बढ़कर 37 करोड़ हो गई, 2000 में 100 करोड़ और अभी 2020 के शुरुआत में अनुमानतः 135 करोड़ पार कर चुकी है। अनुमान है 2061 में 168 करोड़ हो जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र संघ की 'द वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉसपेक्ट्स 2019' रिपोर्ट के मुताबिक 2027 तक भारत चीन को पीछे छोड़ते हुवे दुनियां में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा। ऐसे में देश में ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो रही है आज पाकिस्तान और चीन जैसे देशों से खतरा कम और जनसंख्या विस्फोट का खतरा ज्यादा बढ़ रहा है। भारत के पास पूरी दुनियां के 2.4 प्रतिशत भूमि है, लेकिन जनसंख्या पूरी दुनियां के 18 प्रतिशत है। 
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जनसंख्या विस्फोट के दुष्परिणाम 


        अनियंत्रित जनसंख्या वृ​द्धि के कारण आज स्वतंत्रता प्राप्ति के 7 दशक बाद भी भारत की 40 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे है। आर्थिक वृद्धि एवं देश के विकास का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा। निरक्षरता एवं कुपोषण की समस्या से छुटकारा नहीं मिल रहा। भुखमरी, निर्धनता, बेकारी, भिक्षावृत्ति तथा अन्य सामाजिक व आर्थिक बुराईयों से छुटकारा तभी मिल सकेगा जब हम अपनी जनसंख्या पर नियंत्रण रखेंगे, अन्यथा हम विकास एवं प्रगति से होने वाले लाभों से वंचित रह जायेंगे। हमारा देश कई समस्याओं से जूझ रहा है। अगर गौर करें तो पायेंगे कि जनसंख्या में वृद्धि इन सभी समस्याओं का मूल कारण है। बेरोजगारी हो या भ्रष्टाचार, अराजकता हो या आतंकवाद, निरक्षरता हो या फिर अन्य सामाजिक समस्यायें जनसंख्या कम होने पर यह स्वतः हल हो सकती हैं।
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लम्बी ट्रैफिक जाम का एक दृश्य

        जनसंख्या विस्फोट के दुष्परिणाम है कि पिछले 4-5 दशकों में बेरोजगारी और कुपोषित लोगों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हुई है। बढ़ती बेरोजगारी का आलम ये है की पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में 200 चपरासी पद के लिए आवेदन आमंत्रित किये गए थे जिसके लिए 50 लाख से अधिक लोगों ने आवेदन दिया था। जनसंख्या वृद्धि का असर शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि सुविधाओं पर सीधे-सीधे पड़ रहा है। स्कूलों में छात्रों को दाखिला नहीं मिलता, अस्पतालों में मरीजों की ठीक से देखभाल नहीं हो पाती और बसों, रेलगाडियों में भीड़भाड़ बढ़ती जा रही है। शहरों, महानगरों में सड़कों पर गाड़ियों की लम्बी-लम्बी कतारों के कारण दिन-रात जाम की स्थिति बनी रहती है।
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रेलवे स्टेशन में छात्रों की भारी भीड़(PC : TWITTER) 

पुरूष नसबंदी अभियान        


आजादी के बाद जनसंख्या विस्फोट से निपटना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। जनसंख्या नियंत्रण के लिए लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करने के लिए  सरकार द्वारा बहुत उपाय किये गए लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं रहा फिर आपातकाल के समय कांग्रेस सरकार द्वारा पुरूष नसबंदी अभियान चलाया गया। जिसमें सभी सरकारी अधिकारियों को साफ निर्देश था कि नसंबदी के लिए तय लक्ष्य को वह समय पर पूरा करें, नहीं तो तनख्वाह रोककर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। परिणामस्वरूप इस दौरान घरों में घुसकर, बसों से उतारकर और लोभ-लालच देकर लोगों की नसबंदी की गई। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ एक साल के भीतर देशभर में 62 लाख से ज्यादा लोगों की नसबंदी कर दी गई। इनमें 15-16 साल के किशोर से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक शामिल थे। यही नहीं गलत ऑपरेशन और इलाज में लापरवाही के कारण करीब दो हजार लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी। फिर आपातकाल के बाद 1977 में कांग्रेस सरकार गिर गई और लोगों को इस जबरन नसबंदी अभियान से राहत मिला। सरकार गिरने के पीछे नसबंदी के फैसले को भी एक बड़ी वजह माना गया। उसके बाद 'हम दो हमारे दो' और 'छोटा परिवार सुखी परिवार' जैसे परिवार नियोजन सम्बंधी सरकारी नारे बहुत लगाए   गए मुफ्त में गर्भ निरोधक दवाएं और कंडोम बाटे गए किन्तु जनसंख्या नियंत्रण दर में कमी लाने के लिए कभी कोई ठोस पहल नहीं की गई। देश में राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में परिवार नियोजन के क़ानून लागू है लेकिन कानून में कड़े प्रावधानों के कमी के कारण यह प्रभावहीन है। 5 दशक पहले चीन में हो रही अन्धाधुन्ध जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण पाने के लिए 1979 में चीन में एक बच्चे की नीति लागू की गई थी। लेकिन भारत में कड़े कानून के अभाव में देश की अनियंत्रित जनसंख्या देश के विकास में बाधा बनता रहा है।

बढ़ती आबादी एक राजनीतिक विफलता


वास्तव में देश की अनियंत्रित बढ़ती आबादी राजनीतिक विफलता का ही परिणाम है। जनसंख्या नियंत्रण का सपना ठोस कानून व्यवस्था के बिना पूरा नहीं किया जा सकता है। देश में एक ऐसे कानून की जरूरत है जिससे लोग परिवार नियोजन के लिए बाध्य हों जाय। मौजूदा एनडीए सरकार से देशवासियों को जनसंख्या नियंत्रण कानून के रूप में एक ऐसे कानून की उम्मीद है जो देश की जनसंख्या नियंत्रण के लिए निर्णायक साबित हो। लेकिन ओवैसी जैसे कुछ तथाकथित धर्म के ठेकेदार नेताओं के जनसंख्या नियंत्रण कानून के खिलाफ लगातार बयानबाजी और विरोध से लगता है सरकार के लिए इसे कानून का रूप देना आसान नहीं होगा। ओवैसी जैसे नेता जनसंख्या विस्फोट के दुष्परिणाम के बारे में सोचे बिना अपने कौम को अंधेरे में रख जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुददों का अपने राजनीतिक फायदे के लिए हमेशा से विरोध करते रहे हैं ताकि दिन-प्रतिदिन मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ती रहे और उनका वोट बैंक का फसल लहलहाते रहे। बात हिन्दुओं की कि जाए तो बिना कानून पास हुए भी परिवार नियोजन के मामले में जहां करीब 90 फीसदी हिन्दू एक या दो बच्चों के सिद्धांत पर चल रहे हैं, वहीं मुसलमान अपने धर्म संबंधित धार्मिक मान्यताओं के कारण परिवार नियोजन को धर्म के विरुद्ध मानते हैं। आलम यह है की जिनके घर में खाने के दो वक्त का अनाज नहीं है वो भी अपने वर्तमान और भविष्य का फिक्र किये बगैर बच्चे-दर-बच्चे पैदा किये जा रहे हैं उन्हें न अपने बच्चे के स्वास्थ्य से मतलब है और न ही उनके शिक्षित होने से। जिसके कारण कम हीं उम्र से उनके बच्चों को माता-पिता का सहयोग मिलना बन्द हो जाता है और फिर वही बच्चे शिक्षा, रोजगार और सहयोग के अभाव में लाचारी और बेगारी में कहीं पंचर बनाते, मजदुरी करते तो कभी गलत संगत में पड़ कर चोरी-डकैती करते देखे जाते हैं। ओवैसी जैसे नेता अपने राजनीतिक फायदे के लिए दशकों से मुसलमानों का इस्तेमाल करते आये हैं। वे उन्हें शिक्षा, रोजगार और बेहतर जीवनयापन के लिए प्रेरित करने के बजाय घटिया धार्मिक मान्यताओं में उलझाये रखते हैं ताकि ये अशिक्षित रहे और उनके वोट बैंक बने रहे।

जनसंख्या नियंत्रण कानून पर राज्यसभा में निजी विधेयक पेश।

     जनसंख्या नियंत्रण को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  का नजरिया हमेशा से हीं स्पष्ट रहा है। आरएसएस जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर दशकों से आवाज उठाता रहा है। कई मौकों पर आरएसएस प्रमुख कह चुके हैं की यदि सरकार जनसंख्या नियंत्रण के लिए दो बच्चों की नीति जैसे कोई कानून बनाती है तो संघ उस कानून का समर्थन करेगा। संघ के विचारक और राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा द्वारा 12 जुलाई 2019 को राज्यसभा में प्रति दंपति दो बच्चों के मानकों से संबंधित एक निजी विधेयक पेश किया गया। इस विधेयक में एक परिवार में सिर्फ़ दो बच्चों के होने का ज़िक्र किया गया। इस विधेयक का नाम जनसंख्या विनियमन विधेयक 2019 रखा गया था।

इस विधेयक के कुछ प्रावधान...


दो बच्चे की नीति न मानने वालों को...
लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित किया जाए

नौकरियों में प्राथमिकता ना मिले

लोन लेने पर अधिक ब्याज़ लगे

जमा रकम में कम ब्याज़ मिले

दो बच्चे की नीति मानने वाले को...

बैंक डिपॉज़िट में ज़्यादा ब्याज़ मिले

बच्चों को शिक्षा में प्राथमिकता मिले
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प्रो. राकेश सिन्हा एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए(PC: TWITTER)

अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि विकास में बाधक


      विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए जनसंख्या पर नियन्त्रण करना अतिआवश्यक बन पड़ा है। हमारी आबादी में अभी भी हर दिन पचास हजार की वृद्धि हो रही है। इतनी बड़ी जनसंख्या को भोजन मुहैया कराने के लिए यह आवश्यक है कि हमारा खाद्यान्न उत्पादन प्रतिवर्ष उस अनुपात में बढ़े, वर्तमान में ये सम्भव नहीं है जिसके कारण दूसरे देशों के प्रति हमारी खाद्यान्न निर्भरता बढ़ती रही है जो देश के विकास के मार्ग में बाधा उत्पन्न करती है। अनियंत्रित जनसंख्या देश में अर्थव्यवस्था, सामाजिक समरसता और संसाधन का संतुलन बिगाड़ रहा है। जनसंख्या और संसाधनों के बीच संतुलन बना रहे इसके लिए देश में जनसंख्या नियंत्रण अति आवश्यक बन पड़ा है एक आंकड़े बताते हैं पिछले सात दशकों में भारत की जनसंख्या में 366 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं इस अवधि में अमेरिका की जनसंख्या में सिर्फ 113 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

        2019 में दूसरी बार एनडीए सरकार बनने के बाद लगातार केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक पर प्रतिबंध, कश्मीर से धारा 370 का खात्मा और नागरिकता संशोधन कानून जैसे कई निर्णायक कदम उठाये जा चुके हैं अब भारतीय जनता को उम्मीद है सरकार जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में ठोस पहल करते हुवे इसके लिए कोई प्रभावी कानून बनाएंगी।








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