खबरों की समीक्षा, सच्चाई और जनहित ख़बरों के लिए Jantantra.net पर आपका स्वागत है...

Wednesday, 19 February 2020

राहुल गांधी काँग्रेस की डूबती नैया को पार लगा पाएंगे?

राहुल गाँधी का जीवन परिचय और राजनीतिक भविष्य

राहुल गाँधी, rahul gandhi, congress, काँग्रेस, INC, सोनिया गाँधी, soniya gandhi
राहुल गाँधी (फ़ोटो : सोशल मीडिया)
राहुल गांधी भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं। 19 जून 1970 को नई दिल्ली में जन्मे राहुल गाँधी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तथा वर्तमान काँग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी के पुत्र हैं। राहुल गाँधी वर्तमान में केरल के वायनाड से सांसद हैं।

राहुल गाँधी की शिक्षा

    दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल तथा सेंट स्टीफ़ेन्स कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात वह हार्वर्ड तथा कैम्ब्रिज जैसे शीर्ष संस्थानों से उच्च शिक्षा ग्रहण किए। स्नातक स्तर तक की पढ़ाई के बाद उन्होंने ब्रिटेन में एक प्रबंधन परामर्श कंपनी में काम किया फिर 2002 के अंत में वह मुंबई में स्थित एक आउटसोर्सिंग कंपनी से कुछ समय के लिए जुड़े।
राहुल गाँधी, rahul gandhi, congress, काँग्रेस, INC, सोनिया गाँधी, soniya gandh
राहुल गाँधी (PC : Social media)

राहुल गाँधी का राजनीतिक कॅरियर

उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से 2004 के लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी के रूप में पहली बार राजनीति में कदम रखे। संसद में इसी लोकसभा क्षेत्र का नेतृत्व कभी उनके पिता राजीव गाँधी और चाचा संजय गाँधी कर चुके हैं और तब इस लोकसभा सीट पर उनकी माँ थी, जब तक वह पड़ोस के निर्वाचन-क्षेत्र रायबरेली स्थानान्तरित नहीं हुई थी। राहुल गाँधी यह चुनाव विशाल मत से जीते, वोटों में 1,00,000 के अंतर के साथ इन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र को गाँधी परिवार का गढ़ बनाए रखा। अगले लोकसभा चुनाव 2009 में उन्होंने उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 3 लाख से भी अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया। इन चुनावों में काँग्रेस को उत्तर प्रदेश में कुल 80 लोकसभा सीटों में से 21 सीटें प्राप्त हुई। इस जीत का श्रेय राहुल गाँधी को दिया गया। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में  उत्तर प्रदेश में काँग्रेस को मात्र 2 सीटें मिली। इन दो सीटों में से एक था अमेठी जहाँ से राहुल गाँधी लगातार तीसरी बार जीते तथा दूसरा रायबरेली से सोनिया गाँधी। कांग्रेस पूरे देश में मात्र 44 सीटों पर सिमट कर रह गई और इस तरह राहुल गाँधी के उभरते राजनीतिक जीवन को अचानक ब्रेक लग गया। काँग्रेस की अध्यक्षा तो सोनिया गाँधी रहती रही हैं लेकिन कांग्रेस में निर्णय और नेतृत्व राहुल गाँधी का रहा है। 2014 के बाद धीरे-धीरे कांग्रेस के हाथों से एक-एक कर राज्य दर राज्य खिसकता गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को दूसरी बार लगातार बहुमत प्राप्त हुवा और कांग्रेस मात्र 52 सीटों पर सिमट कर रह गई। राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य को मजबूती प्रदान करने के लिए उन्हें 16 दिसम्बर 2017 को कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया लेकिन उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार का जिम्मेदारी लेते हुवे 3 अगस्त 2019 को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। 2019 लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी दो सीटों(अमेठी और वायनाड) से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें अमेठी में भाजपा के स्मृति ईरानी से पराजित होना पड़ा। राहुल गांधी के नेतृत्व में धीरे-धीरे कांग्रेस सिमटता गया लेकिन छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बदौलत सरकार बनाने से कांग्रेस में थोड़ी जान आई।
राहुल गाँधी, rahul gandhi, congress, काँग्रेस, INC, सोनिया गाँधी, soniya gandhi
राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी किसानों से मिलते हुवे (PC : Social media)

राहुल गाँधी के विवादित बयान

   राहुल गाँधी अपने कुछ बयानों और भाषणों को लेकर हमेशा से विवादों में रहे हैं। चाहे उनका गाँधी जी की हत्या में आरएसएस का हाथ होने जैसे बयान हो या फिर यूपी के युवाओं के दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी करने और भीख माँगने जैसे बयान हो, उनके कुछ बयानों के कारण तो उन्हें कोर्ट का भी सामना करना पड़ा है। 2013 में सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों को बचाने को लेकर कांग्रेस द्वारा लाए गए अध्यादेश पर राहुल गांधी के बयान से केंद्र सरकार को भारी किरकिरी हुवा था। राहुल गांधी ने अध्यादेश के मुद्दे पर कहा था कि ये बिल्कुल बकवास है, इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए। इस संदर्भ में नीति आयोग बना दिए गए योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने अपनी नई किताब 'बैकस्टेज : द स्टोरी बिहाइंड इंडिया हाई ग्रोथ ईयर्स' में इसका खुलासा करते हुए लिखते हैं की इस घटनाक्रम के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस्तीफा देना चाहते थे। मनमोहन सिंह तब अमेरिका दौरे पर थे और अहलूवालिया मनमोहन के साथ गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। मनमोहन सिंह ने पूछा था कि क्या उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिये। श्री मोंटेक ने कहा कि इस पर मैने कहा की इस्तीफा देना सही नहीं होगा।
राहुल गाँधी, rahul gandhi, congress, काँग्रेस, INC, सोनिया गाँधी, soniya gandhi
राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी(PC : सोशल मीडिया)
राफेल ख़रीद में भ्रष्टाचार को लेकर दिए गए अपने भाषणों और विभिन्न प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे दर्जनों बार राफेल के कीमत को बदलते रहे। कई बार वे ऐसा कुछ बोल जाते हैं जिसका सफाई देने में कांग्रेस प्रवक्ताओं को भी किरकिरी हो जाता है। एक आंकड़े बताते हैं भारतीय राजनेताओं में सबसे ज्यादा मीम राहुल गाँधी पर बने हैं। दर्जनों ऐसे बयान और भाषण के अंश है जिनके कारण सोशल मीडिया पर हमेशा उन्हें ट्रोल किया जाता रहा और वो विवादों में रहे। इन सब के कारण कुछ लोग उन्हें अपरिपक्व नेता मानते हैं। कुछ लोगों का मानना है राहुल गाँधी राजनीति के लिए बने हीं नहीं है। शशि थरूर, जयराम रमेश, ए. के. एंटनी, सलमान खुर्शीद, गुलाम नबी आजाद जैसे कांग्रेस के सैकडों अनुभवी और गुणी नेताओं को दरकिनार कर केवल नेहरू-गाँधी परिवार का वारिस होने के बदौलत उन्हें जबरदस्ती प्रधानमंत्री बनाने के चक्कर में कांग्रेस खुद अपना अस्तित्व खोते चली जा रही है। राहुल गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस 30 चुनाव से अधिक हार चुकी है लेकिन न कोई कांग्रेस के नेता उनके खिलाफ बोल सकते हैं और न हीं बोलने की हिम्मत रखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है राहुल गाँधी हीं कांग्रेस है, एक शब्दों में कहें तो काँग्रेस जिसने कभी देश के लिए अपने जीवन समर्पित कर देने वाले सैकड़ों नेता दिया आज एक परिवार का जागीर बन कर रह गया है। कांग्रेस के बड़े से बड़े नेता भी गाँधी परिवार की चाटूकारिता में लगे रहते हैं क्योंकि उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यही एक उपाय दिखता है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में काँग्रेस

      हाल हीं में सम्पन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को कुल 70 सीटों में से एक भी सीट प्राप्त नहीं हुई, कांग्रेस के 66 उम्मीदवारों में से 63 की जमानत तक जब्त हो गई। इन सीटों पर कांग्रेस को कुल वोटों के पांच फीसदी से भी कम वोट मिले। 15 साल तक दिल्ली की सत्ता में रही कांग्रेस लगातार दूसरी बार खाता भी नहीं खोल पाई लेकिन जब हार की जिम्मेदारी की बात आती है तो स्थानीय नेताओं के सर डाल दिया जाता है और यदि कहीं भी थोड़ी सफलता हाथ लगती है तो उसे राहुल गाँधी का काबिलियत बता कर उसे एक मजबूत और दूरदर्शी सोच वाले नेता के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है।
राहुल गाँधी, rahul gandhi, congress, काँग्रेस, INC, सोनिया गाँधी, soniya gandhi
राहुल गाँधी एक सभा को सम्बोधित करते हुए (PC : FLICKR)

राहुल गाँधी/कांग्रेस के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां...

  • राजीव गाँधी की हत्या के बाद सितंबर 1991 में एसजीपी कानून 1988 में संशोधन के बाद गाँधी परिवार (सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी) को वीवीआईपी सुरक्षा सूची में शामिल कर एसपीजी सुरक्षा प्रदान किया गया था, जिसे हाल हीं में वापस ले लिया गया है। गांधी परिवार के लिए अब जेड प्लस (Z+) कैटेगरी की सुरक्षा के तहत एसपीजी के बराबर हीं सुरक्षा गार्ड्स की तैनाती की गई है।
  • राहुल गांधी जापान के मार्शल आर्ट अकीड़ो में ब्लैक बेल्ट हैं, एकिडो जापान की एक मार्शल आर्ट है, इसमें किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं होता।
  • 13 दिसम्बर 2001 को भारतीय संसद पर हमला करने वाले आतंकवादी अफजल गुरु को कांग्रेस सरकार में 09 फरवरी 2013 को फांसी दिया गया था।
  • जुलाई 2018 में लाये गए अविश्वास प्रस्ताव पर कॉंग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी भ्रष्टाचार, राफेल, बढ़ती बेरोजगारी, नोटबन्दी, जीएसटी, मोब लिंचिंग पर बोलते हुए संसद में कहा था आप सोचोगे मेरे दिल में पीएम के खिलाफ गुस्सा, क्रोध, नफरत है। मगर मैं दिल से कहता हूं, मैं पीएम, बीजेपी आरएसएस का आभारी हूं कि इन्होंने मुझे कांग्रेस का मतलब सिखाया, हिंदुस्तानी का मतलब सिखाया इसके लिए दिल से धन्यवाद। आपने मुझे धर्म, शिवजी और हिंदू होने का मतलब समझाया इसके लिए आपका धन्यवाद। उनके इस भाषण को विपक्षी नेताओं ने बहुत सराहा था।
  • नेहरू-गाँधी परिवार से आने वाले राहुल गाँधी पर भाजपा द्वारा राजनीति में परिवारवाद का आरोप लगाते हुए हमेशा हमला करते पाया गया है, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रैलियों में कई बार शहजादे जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया।
  • राहुल गांधी 2004 से लगातार चौथी बार सांसद निर्वाचित हुए हैं उनकी पार्टी कॉंग्रेस 2004 से 2014 तक सत्ता में रही। इस दौरान वह कभी सरकार में कोई मंत्री पद ग्रहण नहीं किए लेकिन कांग्रेस में सर्वेसर्वा की भूमिका में रहे और इस दौरान पारित होने वाले कानून तथा योजनाओं में निर्णायक का भूमिका निभाते रहे।
  • 2013 में सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों को बचाने को लेकर कांग्रेस द्वारा लाए गए अध्यादेश के मुद्दे राहुल गाँधी ने मीडिया के बीच कहा था कि ये बिल्कुल बकवास है, इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए।
  • अपने भाषणों तथा बयानों में गलत तथ्यों तथा आंकड़ो को पेश करने का आरोप लगाते हुवे राहुल गाँधी को एक अपरिपक्व नेता के रूप में प्रचारित करने के लिए भाजपा नेताओं द्वारा उन्हें पप्पू जैसे उपनाम से सम्बोधित किया जाता रहा है। कभी भाजपा में रहे वर्तमान कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धु पहली बार राहुल गाँधी के लिए पप्पू शब्द का इस्तेमाल किए थे।
  • राहुल गांधी ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रोलिंस कॉलेज फ्लोरिडा से 1994 में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की।
  • स्नातक स्तर तक की पढ़ाई के बाद राहुल गाँधी ब्रिटेन में एक प्रबंधन कंपनी में 'रॉल विंसी'  के नाम से नियोजित थे। राहुल गाँधी का दूसरे नाम से उस कम्पनी में नियोजित होना कांग्रेस इसे उनके सुरक्षा का हवाला देते आई है।
  • जनवरी 2019 में रिलीज विजय गुट्टे की फ़िल्म 'एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में अर्जुन माथुर ने राहुल गाँधी का रोल निभाया है।
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा अपनी घोषणा पत्र में गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए शामिल किया गया न्यूनतम आय योजना बहुत चर्चा में रहा था। इसके बारे में राहुल गांधी ने कहा था कि इसके तहत जनसंख्या का 20 प्रतिशत (5 करोड़ के आसपास) गरीब परिवारों को इसका लाभ मिलेगा, इसके तहत हर परिवार को सालाना 72,000 और पांच साल में 3,60,000 रुपये डाले जाएंगे। उन्होंने नारा दिया- 'ग़रीबी पर वार 72 हज़ार' और कहा कि 'हमारा पहला कदम न्याय का कदम है।'
  • वर्तमान भाजपा नेता सुब्रमनियम स्वामी द्वारा 2012 में सोनिया गाँधी, राहुल गांधी एवं उनकी कम्पनियों एवं उनसे सम्बन्धित अन्य लोगों के विरुद्ध 'नेशनल हेराल्ड प्रकरण' में मुकदमा दायर किया गया है। सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि गांधी परिवार हेराल्ड की संपत्तियों का अवैध ढंग से उपयोग कर रहा है जिसमें दिल्ली का हेराल्ड हाउस और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। ये केस फिलहाल दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में है और सोनिया व राहुल गाँधी इसमें जमानत पर हैं।
  • 2019 लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी पहली बार दो सीटों से चुनाव लड़े। उत्तर प्रदेश के अमेठी तथा केरल के वायनाड से। वायनाड सीट पर राहुल गांधी को सात लाख से ज्यादा वोट मिले और उन्हें 4 लाख 31 हजार वोटों से जीत हासिल की, हालांकि अमेठी सीट पर स्मृति ईरानी से वह लगभग 55,000 वोटों से हार गए।

इसे भी पढ़ें...





Monday, 10 February 2020

कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली एयरपोर्ट अलर्ट पर।


कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली एयरपोर्ट अलर्ट पर।

कोरोना वायरस, corona virus

दुनियां में चिकित्सा के क्षेत्र में जहाँ नित्य नए आविष्कार तथा रिसर्च के कारण सैकडों प्रकार के बीमारियों से मुक्ति आसान हुवा है वहीं समय-समय पर कई चुनौतियां भी सामने आई है। पूरी दुनियां वर्तमान में जिस नई चुनौती का सामना कर रही है वो है कोरोना वाइरस। यह वाइरस चीन के वुहान शहर से शुरू होकर पूरे एशिया में फैल गया है, अब तक 22 देशों में इसके संदिग्ध मामले सामाने आ चुके है। इसको लेकर पूरी दुनियां आशंकित है। यह एक महामारी का रूप लेता जा रहा है। इसको देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इस वायरस पर कोई दवा के असर न करने के कारण इनका संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है।
कोरोना वायरस, corona virus

कोरोना वायरस से संक्रमित रोगी का इलाज अभी तक सम्भव न हो पाने के कारण इससे पहले हीं सतर्क रहना उचित बताया जा रहा है। इस वायरस के संक्रमण से अभी तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। चीन से हाल हीं में आये कुछ भारतीयों में भी इस वायरस से संक्रमित होने का पता चला है। जिसके कारण देश के सभी एयरपोर्ट पर सुरक्षाकर्मियों को एलर्ट कर दिया गया है।
IGI AIRPORT, DELHI (PC : FLICKR)
दिल्ली एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट में से एक है जहाँ प्रतिदिन दुनियाभर से हजारों यात्री आवागमन करते हैं। दिल्ली एयरपोर्ट के सुरक्षाकर्मियों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए खास तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। एयरपोर्ट की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों को प्रतिदिन यात्रियों तथा एयरपोर्ट परिसर की जाँच के दौरान सैकडों यात्रियों से नजदीक से बात करना पड़ता है। ऐसे समय में कोरोना वायरस के आदान प्रदान की संभावना सबसे अधिक होती है। हाल हीं में ऐसी हीं संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षाकर्मियों को खास तरह का ट्रेनिंग दिया गया। इसमें डॉक्टरों द्वारा सुरक्षाकर्मियों को सतर्क करते हुए उन्हें इसे अपनाने का सख्त हिदायत दिया गया...

इससे बचाव के उपाय


◆ अपने हाथ को समयांतराल में धोते रहना है।
◆ हाथ से अपने मुँह, नाक, गाल छूने से पहले सेनेटाइजर से हाथ को अच्छी तरह धो लें।
◆ अपने चेहरे पर ह समय मास्क लगाए रखें।
◆ किसी से बात करते समय कम-से-कम तीन फिट की दूरी बनाये रखें।

इस बीमारी के लक्षण

इस वायरस से संक्रमित रोगी को बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।



गुदड़ी के लाल लोकप्रिय विधायक जगरनाथ महतो


गुदड़ी के लाल माटी पुत्र जगरनाथ महतो


जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक

जगरनाथ महतो जमीन से जुड़े हुवे नेता माने जाते हैं। वे डुमरी विधानसभा क्षेत्र से लगातार चौथी बार विधायक निर्वाचित हुवे हैं। जगरनाथ महतो जी सदैव जनता के हित के प्रति समर्पित रहते हैं। अपने क्षेत्र में टाइगर के उपनाम से जाने जाते हैं जगरनाथ महतो जी।

जगरनाथ महतो : जनहित की राजनीति

     मौजूदा समय में जब राजनीति एक प्रकार का व्यापार बन गया है। कुछ राजनेता अपने हित को सर्वोपरी मान राजनीति का चेहरा, चाल और चरित्र हीं बदलने में लगे हैं। जहाँ राजनीति सेवा का माध्यम नहीं पैसा कमाने का जरिया बनता जा रहा है जहाँ आजकल नेता जनता के हित की बाद में सोचते हैं अपना हित पहले देखते हैं वहीं कुछ ऐसे नेता भी हैं जो गरीबों, शोषितों, वंचितों, आदिवासियों और पिछड़ों के हक के लिए लड़ते रहे हैं ऐसे हीं नेताओं में से एक हैं झारखंड के डुमरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक माटी के लाल जगरनाथ महतो। उनकी बिंदास बोल, बेबाक अंदाज, बुलंद शख्सियत और अलग स्टाइल के कारण लोग उन्हें टाइगर के उपनाम से बुलाते हैं।
जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक
एक जनसुनवाई में एक वृद्ध की समस्या सुनते हुए

जगरनाथ महतो जी का व्यक्तिगत जीवन परिचय

श्री जगरनाथ महतो जी का जन्म 01 जनवरी 1967 को झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत अलारगो गाँव में हुवा था। उनके पिता श्री नेमनारायण महतो एक साधारण किसान थे तथा माता श्रीमती गुंजरी देवी एक गृहणी।  जगरनाथ महतो चार भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े हैं। उनके चार बेटियां और एक बेटा है। एक भाई वासुदेव महतो तारमी पंचायत के मुखिया हैं। माता गुंजरी देवी का निधन कुछ वर्षों पूर्व हो चुका है। प्राथमिक शिक्षा पैतृक गांव अलारगो स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय से हुई है। वह 10वीं तक शिक्षा ग्रहण किये हैं। बचपन से हीं ग्रामीण परिवेश से जुड़े रहे हैं। उनका अधिकांश समय पैतृक गाँव अलारगो तथा आस-पास के क्षेत्रों में बिताते रहे हैं।

जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक


    उनको कृषि कार्यों में गहरी रुचि है। जब भी मौका मिलता है वो कृषि कार्यों में लग जाते हैं। उन्हें खेतों में हल चलाते तो कभी ट्रेक्टर से हल जोतते प्रायः देखा जाता रहा है। श्री महतो का मानना है की देश की समृद्धि के लिए कृषि तथा गाँव का विकास आवश्यक है।
जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक
अपने समर्थकों के बीच क्रिकेट खेलते हुए

    उनको खेलों के प्रति बहुत लगाव है जब भी मौका मिलता है फुटबॉल तथा क्रिकेट जरूर खेलते हैं।
जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक

    अपने विधानसभा क्षेत्र के छात्रों को इण्टर स्तर तक की शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े इसके लिए उन्होंने डुमरी के मंझिलाडीह में 2017 में 'जगरनाथ महतो इण्टर कॉलेज' नाम से नया कॉलेज आरंभ किया। जगरनाथ महतो अपने राजनीति के शुरू दिनों से हीं किसानों, मजदूरों, शोषितों के हितों के प्रति समर्पित रहे हैं। हाल हीं के वर्षों में एक बार जब रेलवे द्वारा लोकल-पैसेंजर ट्रेनों में फेरी वालों को मूंगफली आदि बेचने से प्रतिबंधित किया गया तो श्री महतो खुद चंद्रपुरा जंक्सन से गोमो तक एक पैसेंजर ट्रेन में मूंगफली बेचकर फेरीवालों के अधिकारों के लिए रेलवे के प्रति अपना विरोध प्रकट किया।
जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक

जगरनाथ महतो : राजनीतिक जीवन

जगरनाथ महतो डुमरी विधानसभा सीट से झामुमो प्रत्याशी के रूप में चौथी बार(2019 में) लगातार चुनाव जीते हैं। इसके पहले वे 2005, 2009 तथा 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड के डुमरी विधानसभा सीट से हीं विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। इसके पहले इस विधानसभा क्षेत्र से कोई भी विधायक लगातार तीन और चार बार विजय रथ पर सवार नहीं हो पाए थे। हाल हीं सम्पन्न हुवे झारखंड विधानसभा चुनाव(2019) में आजसू की यशोदा देवी को 34288 मतों से हराया। उसके बाद हेमन्त सोरेन के अगुवाई में बने नई सरकार में 28 जनवरी को उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली है, उन्हें झारखंड सरकार में शिक्षा मंत्री का पदभार मिला है। मंत्री पद की शपथ लेकर निकलने पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा की 'मंत्री का रौब व रुतबा लोग मुझमें नहीं देखेंगे, खुद को एक सफल मंत्री के रूप में साबित करूंगा। साथ हीं उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के जनता का आभार व्यक्त किया। श्री महतो ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं को पूरा करना उनका दायित्व होगा, सभी मंत्री अच्छा काम करें।
    
जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक
एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में मांदर बजाते हुए

   झारखंड के शिक्षा मंत्री का पदभार संभालने के बाद से वे राज्य के जिलों के सरकारी स्कूलों का मूल्यांकन दौरा कर रहे हैं, इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों के पिछड़ेपन का कारण पता करना और लोगों को सरकारी स्कूलों में बच्चों के एडमिशन के लिए प्रोत्साहित करना है। इस दौरान वह न सिर्फ स्कूलों में जाकर बच्चों से बात कर रहे हैं बल्कि शिक्षकों से शिक्षा के सुधार के विषय में सुझाव का आदान-प्रदान कर रहे है। हाल हीं में वे गिरिडीह के पीरटांड़ प्रखंड के मांझीटाँड स्थित उत्क्रमित विद्यालय गए थे। 
जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक

जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक
एक स्कूल में बच्चों के साथ मध्याहन भोजन करते हुए

जहाँ उन्होंने न सिर्फ बच्चों के साथ बैठ कर मध्याहन भोजन ग्रहण किए बल्कि अपना थाली भी खुद धोए। इसके कुछ तस्वीर ट्विटर पर ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा की "गिरिडीह के माँझीटांड़ में बच्चों के साथ मध्याह्न भोजन करना अद्वितीय हर्ष है। मैं नियमित रूप से कहीं भी..किसी भी विद्यालय में मध्याह्न भोजन करूँगा।"
   

उनका स्कूलों में जाकर बच्चों के बीच जमीन में बैठना और गलती करने वाले शिक्षक को दंडित न कर लाल गुलाब देकर सुधार करने का मौका देना सुर्खियां बटोर रहा है।
जगरनाथ महतो, jagarnath mahto, education minister jharkhand, dumari vidhayak, डुमरी विधायक


महतो जी के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों तथा इसके लिए उनके द्वारा उठाए गये त्वरित कदम से लगता है आने वाले दिनों में सरकारी स्कूलों के दिन फिरने वाले हैं। उम्मीद है एक शिक्षा मंत्री के रूप में वे झारखंड के युवाओं के शिक्षा तथा रोजगार के बेहतरी के लिए समुचित प्रयास करेंगे।
















Saturday, 8 February 2020

आत्महत्या (Suicide) क्यों करते हैं?


आत्महत्या (Suicide) क्यों करते हैं?

Suicide, आत्महत्या, फांसी, hang

आत्महत्या का अर्थ होता है स्वयं को मारना अर्थात अपना जीवन समाप्त कर लेना। आत्महत्या क्यों करते हैं। आत्महत्या जैसे कदम उठाने से पहले इंसान के दिमाग में क्या चलता रहता है। क्या केवल कमजोर दिल वाले आत्महत्या करते हैं?

आत्महत्या : यह एक ऐसी घड़ी होती है जब इंसान अपने जीवन से इतना हारा हुवा महसूस करता है की अपनी हीं साँसों को पूर्णविराम देने का फैसला कर लेता है। वह नकारात्मक विचारों से भर जाता है उन्हें जीवन को ऐसे दुखों के महासागर के रूप में देखने लगता है, जिनका कभी अंत न होने वाला हो। वह हर वक्त यही सोचता रहता है की इस दुख से मुक्ति का आत्महत्या के सिवाय कोई और रास्ता नहीं है। ऐसे लोग ख़ुद को बेकार मानने लगते हैं, धीरे-धीरे उन्हें लगने लगता है कि उनके आसपास के लोग उनसे नफरत करते हैं कोई उनसे प्यार नहीं करता, उन्हें अपना जीवन नीरस लगने लगता है वह ज़िंदगी की बेहतरी का रास्ता अपने जीवन की समाप्ति में ही देखने लगता है। आत्महत्या इस फैसले को लेने से पहले इंसान का दिमाग और सोच शायद उस चरम सीमा तक पहुँच जाता हैं जिसके बाद उसे कोई रास्ता नहीं सूझता। उसके अंदर की समझ मर जाती है और वो जिंदगी और मौत के बीच का फर्क भुला देता है।
फाँसी, hang, suicide, आत्महत्या
(PC : PIXABAY)

 कहते हैं आत्महत्या से इंसान बाद में मरता है उनकी मति पहले मर जाती है। कभी-कभी कुछ लोग परेशानी, क्रोध, निराशा और शर्मिंदगी से भरकर ऐसा क़दम उठा लेते हैं क्योंकि ऐसे परिस्थिति में उनकी मनोस्थिति कुछ समय के लिए स्थिर नहीं रह पाती और उस क्षण वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। कुछ लोगों में आत्महत्या करने के विचार बड़े तीव्र होते हैं वह छोटी-छोटी परेशानी में आकर भी आत्महत्या जैसे कदम के बारे में सोचने लगते है तो कुछ में ऐसे विचार क्षणिक होते हैं, जिन्हें बाद में अपने ऐसे विचार पर आश्चर्य भी होता है।

आत्महत्या के पीछे कारण

        आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन को माना जाता है। इस प्रतियोगी भागदौड़ भरी दुनियां में इंसानों में एक दूसरे से श्रेष्ठ बनने और दिखने की होड़ लगी रहती है, उन्हें अपनी इच्छा के अनुरूप चीजें नहीं मिलती है, तब वह डिप्रेशन में चला जाता है और जब समय पर इस अवसाद से छुटकारा नहीं मिल पाता है तो वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेता है।
(PC : PIXABAY)

 विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लुएचओ) के एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हर वर्ष 80 लाख लोग आत्महत्या के कारण मरते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियां में हर 40 सेकेंड में एक मृत्यु आत्महत्या की वजह से होती है।     
        भारत की बात करें तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के एक आंकड़े के अनुसार भारत में प्रति वर्ष एक लाख तीस हजार से अधिक लोगों की मृत्यु आत्महत्या के वजह से होती है। देखा गया है पारिवारिक समस्याओं, लाइलाज बीमारियों, शादी संबंधित समस्याओं, कर्ज और दिवालियापन से तंग आकर मुख्यतः लोग आत्महत्या करते हैं।
       कहते हैं आत्महत्या करने वाले कमजोर दिल, खराब परिस्थितियों से हार मान जाने वाले बुझदिल इंसान होते हैं लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे व्यक्तियों को भी आत्महत्या कर अपना जीवन समाप्त करते पाया गया है जो एक मजबूत इच्छाशक्ति और बड़े विचारवान होते हैं। ऐसे कई लोग हैं जो अपने पूरे जीवनकाल लोगों को एक बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करते रहे। लोगों को परेशानियों और जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय पाने के लिए मार्ग दिखाते रहे लेकिन जब अपने जीवन में कठिनाई आई तो हार मानकर आत्महत्या जैसे कदम उठा लिए। 
    आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज को भला कौन नहीं जानता। पीएम नरेंद्र मोदी, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, लता मंगेशकर, आशा भोंसले और अनुराधा पौडवाल जैसे कई बड़े नेता, उधोगपति, अभिनेता और गायक कभी उनके आश्रम की शोभा बढ़ा चुके हैं। भय्यूजी महाराज जीवन भर लोगों को परेशानियों में मन की स्थिरता बनाये रखने तथा जीवन की कठिनाइयों से न घबराकर उनपर विजय पाने के लिए प्रेरित करते रहे लेकिन अन्ततः अपने हीं जीवन की कठिनाइयों से हार कर आत्महत्या कर बैठे। इतिहास में अनेकों उदाहरण हैं जिन्होंने सशक्त व्यक्तित्व के होने के वावजूद आत्महत्या जैसे कदम उठाकर अपने जीवन समाप्त कर लिया हो। 
       हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला का आत्महत्या बहुत सुर्खियों में रहा था। इस घटना के बाद देशभर में सैकड़ों विरोध प्रदर्शन हुए थे। रोहित वेमुला ने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर लिया था। कहा जाता है कि विश्वविद्यालय परिसर में अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच हुए मारपीट के बाद आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेताओं पर हुवे कार्रवाई से दुखी था। इस कार्रवाई में रोहित समेत चार छात्रों को विश्वविद्यालय से निलम्बित कर दिया गया था तथा छात्रावास भी खाली करा दिया गया था। रोहित समाजशास्त्र से पीएचडी का छात्र था लेकिन कठिन परिस्थितियों में अपने को टूटने से नहीं बचा सका।
      ग्‍लैमर और शोहरत से चकाचौंध बॉलीवुड अपने भीतर कई रहस्‍यों को छिपाये हुए है। यहाँ आये दिन कलाकारों के प्रेम-प्रसंग, धोखा, ब्रेकअप और लड़ाई-झगडे आम बात हो गई है और इन परेशानियों से तंग आकर दर्जनों बड़े-बड़े कलाकारों ने अपना जीवन समाप्त कर लिया है। पिछले कुछ दशकों में सिल्क स्मिता, परवीन बॉबी, जिया खान, नसिफ़ा जोसेफ, प्रत्युषा बनर्जी जैसे शीर्ष कलाकारों की आत्‍महत्‍या ने लोगों को इस चमचमाती दुनियां के बारे में बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है।
           कैफे कॉफी डे के संस्थापक वी. जी. सिद्धार्थ ने 2014 में एक इंटरव्यू में कहा था की "कुछ कर गुजरना है तो संकल्प के साथ करो और आसानी से हार मत मानो।" लेकिन दुर्भाग्यवश वे अपने जीवन की कठिनाइयों से हार मान गए और इस दुनियां को अलविदा कह गए। कहते हैं वे अपनी कंपनी के घाटे तथा एक अधिकारी के उत्पीड़न से मानसिक तनाव में थे।
वी. जी. सिद्धार्थ (PC : ट्विटर)

       पूरी दुनियां में 10 सितंबर को वर्ल्ड सूसाइड प्रिवेंशन डे मनाया जाता है ताकि आत्महत्या के कारणों को समझा जा सके और लोगों को आत्महत्या जैसा जानलेवा क़दम उठाने से रोका जा सके।