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Saturday, 8 February 2020

आत्महत्या (Suicide) क्यों करते हैं?


आत्महत्या (Suicide) क्यों करते हैं?

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आत्महत्या का अर्थ होता है स्वयं को मारना अर्थात अपना जीवन समाप्त कर लेना। आत्महत्या क्यों करते हैं। आत्महत्या जैसे कदम उठाने से पहले इंसान के दिमाग में क्या चलता रहता है। क्या केवल कमजोर दिल वाले आत्महत्या करते हैं?

आत्महत्या : यह एक ऐसी घड़ी होती है जब इंसान अपने जीवन से इतना हारा हुवा महसूस करता है की अपनी हीं साँसों को पूर्णविराम देने का फैसला कर लेता है। वह नकारात्मक विचारों से भर जाता है उन्हें जीवन को ऐसे दुखों के महासागर के रूप में देखने लगता है, जिनका कभी अंत न होने वाला हो। वह हर वक्त यही सोचता रहता है की इस दुख से मुक्ति का आत्महत्या के सिवाय कोई और रास्ता नहीं है। ऐसे लोग ख़ुद को बेकार मानने लगते हैं, धीरे-धीरे उन्हें लगने लगता है कि उनके आसपास के लोग उनसे नफरत करते हैं कोई उनसे प्यार नहीं करता, उन्हें अपना जीवन नीरस लगने लगता है वह ज़िंदगी की बेहतरी का रास्ता अपने जीवन की समाप्ति में ही देखने लगता है। आत्महत्या इस फैसले को लेने से पहले इंसान का दिमाग और सोच शायद उस चरम सीमा तक पहुँच जाता हैं जिसके बाद उसे कोई रास्ता नहीं सूझता। उसके अंदर की समझ मर जाती है और वो जिंदगी और मौत के बीच का फर्क भुला देता है।
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(PC : PIXABAY)

 कहते हैं आत्महत्या से इंसान बाद में मरता है उनकी मति पहले मर जाती है। कभी-कभी कुछ लोग परेशानी, क्रोध, निराशा और शर्मिंदगी से भरकर ऐसा क़दम उठा लेते हैं क्योंकि ऐसे परिस्थिति में उनकी मनोस्थिति कुछ समय के लिए स्थिर नहीं रह पाती और उस क्षण वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। कुछ लोगों में आत्महत्या करने के विचार बड़े तीव्र होते हैं वह छोटी-छोटी परेशानी में आकर भी आत्महत्या जैसे कदम के बारे में सोचने लगते है तो कुछ में ऐसे विचार क्षणिक होते हैं, जिन्हें बाद में अपने ऐसे विचार पर आश्चर्य भी होता है।

आत्महत्या के पीछे कारण

        आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन को माना जाता है। इस प्रतियोगी भागदौड़ भरी दुनियां में इंसानों में एक दूसरे से श्रेष्ठ बनने और दिखने की होड़ लगी रहती है, उन्हें अपनी इच्छा के अनुरूप चीजें नहीं मिलती है, तब वह डिप्रेशन में चला जाता है और जब समय पर इस अवसाद से छुटकारा नहीं मिल पाता है तो वह आत्महत्या जैसे कदम उठा लेता है।
(PC : PIXABAY)

 विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लुएचओ) के एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में हर वर्ष 80 लाख लोग आत्महत्या के कारण मरते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियां में हर 40 सेकेंड में एक मृत्यु आत्महत्या की वजह से होती है।     
        भारत की बात करें तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के एक आंकड़े के अनुसार भारत में प्रति वर्ष एक लाख तीस हजार से अधिक लोगों की मृत्यु आत्महत्या के वजह से होती है। देखा गया है पारिवारिक समस्याओं, लाइलाज बीमारियों, शादी संबंधित समस्याओं, कर्ज और दिवालियापन से तंग आकर मुख्यतः लोग आत्महत्या करते हैं।
       कहते हैं आत्महत्या करने वाले कमजोर दिल, खराब परिस्थितियों से हार मान जाने वाले बुझदिल इंसान होते हैं लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे व्यक्तियों को भी आत्महत्या कर अपना जीवन समाप्त करते पाया गया है जो एक मजबूत इच्छाशक्ति और बड़े विचारवान होते हैं। ऐसे कई लोग हैं जो अपने पूरे जीवनकाल लोगों को एक बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करते रहे। लोगों को परेशानियों और जीवन में आने वाली कठिनाइयों पर विजय पाने के लिए मार्ग दिखाते रहे लेकिन जब अपने जीवन में कठिनाई आई तो हार मानकर आत्महत्या जैसे कदम उठा लिए। 
    आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज को भला कौन नहीं जानता। पीएम नरेंद्र मोदी, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, लता मंगेशकर, आशा भोंसले और अनुराधा पौडवाल जैसे कई बड़े नेता, उधोगपति, अभिनेता और गायक कभी उनके आश्रम की शोभा बढ़ा चुके हैं। भय्यूजी महाराज जीवन भर लोगों को परेशानियों में मन की स्थिरता बनाये रखने तथा जीवन की कठिनाइयों से न घबराकर उनपर विजय पाने के लिए प्रेरित करते रहे लेकिन अन्ततः अपने हीं जीवन की कठिनाइयों से हार कर आत्महत्या कर बैठे। इतिहास में अनेकों उदाहरण हैं जिन्होंने सशक्त व्यक्तित्व के होने के वावजूद आत्महत्या जैसे कदम उठाकर अपने जीवन समाप्त कर लिया हो। 
       हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला का आत्महत्या बहुत सुर्खियों में रहा था। इस घटना के बाद देशभर में सैकड़ों विरोध प्रदर्शन हुए थे। रोहित वेमुला ने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर लिया था। कहा जाता है कि विश्वविद्यालय परिसर में अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच हुए मारपीट के बाद आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेताओं पर हुवे कार्रवाई से दुखी था। इस कार्रवाई में रोहित समेत चार छात्रों को विश्वविद्यालय से निलम्बित कर दिया गया था तथा छात्रावास भी खाली करा दिया गया था। रोहित समाजशास्त्र से पीएचडी का छात्र था लेकिन कठिन परिस्थितियों में अपने को टूटने से नहीं बचा सका।
      ग्‍लैमर और शोहरत से चकाचौंध बॉलीवुड अपने भीतर कई रहस्‍यों को छिपाये हुए है। यहाँ आये दिन कलाकारों के प्रेम-प्रसंग, धोखा, ब्रेकअप और लड़ाई-झगडे आम बात हो गई है और इन परेशानियों से तंग आकर दर्जनों बड़े-बड़े कलाकारों ने अपना जीवन समाप्त कर लिया है। पिछले कुछ दशकों में सिल्क स्मिता, परवीन बॉबी, जिया खान, नसिफ़ा जोसेफ, प्रत्युषा बनर्जी जैसे शीर्ष कलाकारों की आत्‍महत्‍या ने लोगों को इस चमचमाती दुनियां के बारे में बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है।
           कैफे कॉफी डे के संस्थापक वी. जी. सिद्धार्थ ने 2014 में एक इंटरव्यू में कहा था की "कुछ कर गुजरना है तो संकल्प के साथ करो और आसानी से हार मत मानो।" लेकिन दुर्भाग्यवश वे अपने जीवन की कठिनाइयों से हार मान गए और इस दुनियां को अलविदा कह गए। कहते हैं वे अपनी कंपनी के घाटे तथा एक अधिकारी के उत्पीड़न से मानसिक तनाव में थे।
वी. जी. सिद्धार्थ (PC : ट्विटर)

       पूरी दुनियां में 10 सितंबर को वर्ल्ड सूसाइड प्रिवेंशन डे मनाया जाता है ताकि आत्महत्या के कारणों को समझा जा सके और लोगों को आत्महत्या जैसा जानलेवा क़दम उठाने से रोका जा सके।





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